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अब मैं, बेपर ही उड़ने लगी हूँ…

Updated: Nov 24, 2020

वो कहते हैं बाल ज़रूरी हैं, लड़की सा दिखने के लिए


वो कहते हैं बाल ज़रूरी हैं, लड़की सा दिखने के लिए,

वो कहते हैं बाल ज़रूरी हैं, सुन्दर सा लगने के लिए।


अगर क़द ऊँचा होता, तो शायद यह जंच भी जाते,

और रंग गोरा होता, तो भी ऐसे ही चल जाते।


वो कहते हैं,

कुछ भी पहन लो, हर कपड़े में तुम एक सी दिखती हो

कुछ भी पहन लो, हर कपड़े में तुम एक सी दिखती हो

और बुरा न मानना पर ज़्यादातर तुम एक छोटा लड़का लगती हो।

वो जब भी मिलते हैं, कई सवाल होते हैं -

पहले वो, “कोई बीमारी हुई है”, पूछते हैं,

फिर शायद मन्नत मांगी है, ऐसा सोचते हैं,

और खुरचने का मन किया, “तो माँ बाप को कुछ हुआ क्या”, ऐसा पूछ लिया,

या फिर हंस कर, "सन्यास ले लिया क्या?"

हंसी को उपसर्ग और प्रत्यय बना कर,

उन्हें लगता है उनका ताना मज़ाक बन गया।


हंसी को…उपसर्ग और प्रत्यय बना कर,

उन्हें लगता है उनका ताना मज़ाक बन गया।

थोड़ी सी सहानुभूति दिखा कर,


उन्हें दखलअंदाज़ी का हक़ मिल गया।

क्योंकि बिना कारण बाल काटना, उन्हें समझ नहीं आता,

अपनी मर्ज़ी का दिखना, अपनी मर्ज़ी से जीना उन्हें बिलकुल नहीं भाता।


वो कहते हैं ,

बाल ज़रूरी हैं क्योंकि ऐसे ही चलता है,


वो कहते हैं ,

बाल ज़रूरी हैं क्योंकि ऐसे ही चलता है,

लड़की का लड़की सा दिखना ही अच्छा लगता है।


क़द की ऊंचाई

पेट की चौड़ाई

सुमेल अंग, खाल का रंग

चलने का अंदाज़, बैठने का ढंग

- लड़की होने के कई नियम हैं


लड़की होने के कई नियम हैं

और लम्बे बाल उन सब में अहम हैं।

मेरे बाल की लम्बाई से उन्हें मेरे नारीत्व, मेरी चरित्र का अनुमान हो गया,

मेरे बाल की लम्बाई से, उन्हें मेरे मन की गहराई का ज्ञान हो गया?

मेरे अस्तित्व के नियम, वो बरसों से बना रहे हैं,

मेरी हद भी…वो मुझे बार बार बता रहे हैं,

मेरे लिए क़ायदे और दायरे...


मेरे लिए,

क़ायदे और दायरे,

लिखने में इतने मशगूल हो गए,

इन्सानियत क्या होती है

भूले जा रहें हैं।


मगर अब,

अब मैं भी बूझने लगी हूँ,

उनकी समझ को समझने लगी हूँ,

उनकी कोशिशों को परखने लगी हूँ;

उनकी चुनौतियों को क़बूलने लगी हूँ


अपने विश्वास, अपने अंदाज़,

अपने शब्द, अपनी आवाज़

अपने फ़ैसले, अपने ख़्याल

अपने क़द, अपने बाल -

अपने कण कण के साथ


अब मैं बेपर ही उड़ने लगी हूँ।


अब मैं, बेपर ही उड़ने लगी हूँ।


आँचल

अप्रैल, २०२०

बॉम्बे